गयाजी में अकाल मृत्यु और दुर्घटना में मरे स्वजनों का त्रिपांडी श्राद्ध एवं प्रेतशिला पिंडदान: नियम, पूजा विधि और पूरा सच!
जीवन में किसी स्वजन का बिछड़ना अत्यंत कष्टदायी होता है, परंतु जब किसी प्रियजन की मृत्यु असमय, अकस्मात या किसी दुर्घटना में हो जाती है, तो वह दुख पूरे परिवार को तोड़कर रख देता है। सनातन धर्म और शास्त्रों के अनुसार, जब कोई जीव अपनी प्राकृतिक आयु पूरी किए बिना अकाल मृत्यु (Unnatural Death) का शिकार बनता है, तो उसकी आत्मा की सांसारिक इच्छाएं अधूरी रह जाती हैं। ऐसी आत्माएं मोह, वासना और कष्ट के कारण 'प्रेत योनि' में भटकने लगती हैं। परिवार में अचानक बीमारियां आना, बनते काम बिगड़ना, वंश वृद्धि में रुकावट और अशांति बने रहना अक्सर इन्हीं असंतुष्ट पितरों का संकेत होता है। परंतु हमारे धर्मशास्त्रों में इस घोर कष्ट का भी एक अचूक समाधान दिया गया है— 'गयाजी धाम में त्रिपांडी श्राद्ध और प्रेतशिला पर पिंडदान' । पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, पूरे ब्रह्मांड में केवल गयाजी ही एक ऐसा सिद्ध क्षेत्र है जहाँ की प्रेतशिला और विष्णुपद वेदी पर त्रिपांडी श्राद्ध करने से भटकती हुई प्रेत आत्माओं को तत्काल मुक्ति मिलती है और वे सीधे भगवान विष्णु के परम धाम को चली जाती हैं। इस 3000 शब्दों की संपूर्ण ए...