गयाजी पिंडदान के बाद भूलकर भी न करें ये 10 गलतियां! पितरों की नाराजगी से बचने के लिए जानें विदाई और घर वापसी के गुप्त नियम
नमस्ते गयाजी! मैं हूँ आपका भाई निशांत । भाइयों, गयाजी की पावन धरती पर जब कोई श्रद्धालु अपने पूर्वजों का पिंडदान और तर्पण कर लेता है, तो उसे लगता है कि 'गंगा नहा लिए', अब सब पूरा हो गया। लेकिन रुको भाई! असली परीक्षा तो पिंडदान के बाद शुरू होती है। अक्सर लोग जोश-जोश में ऐसी गलतियां कर देते हैं कि पूरी पूजा का फल 'जीरो' हो जाता है। क्या आपको पता है कि गयाजी से लौटते समय पंडा जी आपको पीछे मुड़कर देखने से क्यों मना करते हैं? क्या आपको पता है कि गया की मिट्टी आपके साथ घर क्यों नहीं जानी चाहिए? गया का बेटा होने के नाते, आज मैं आपको 'बड़े भाई' की तरह वो कड़वे सच और गुप्त नियम बताऊंगा जो अक्सर लोग अनजाने में छोड़ देते हैं। अगर आपने ये स्टेप्स फॉलो कर लिए, तो यकीन मानिए आपके पितर मुस्कुराते हुए आशीर्वाद देकर विदा होंगे। चलिए, आज इस महा गाइड में गयाजी की मर्यादा का पूरा कच्चा-चिट्ठा खोलते हैं! गयाजी की सीमा छोड़ने से पहले का सबसे बड़ा नियम: "विदाई की मर्यादा" पिंडदान संपन्न होने...