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अब घर बैठे देखें अपनी दादा-परदादा की जमीन का रिकॉर्ड! बिहार भूमि पोर्टल से रसीद और केवाला डाउनलोड करें!

                   
Bihar Bhumi 2026 Online Land Record Check and Receipt Download

Bihar Bhumi वर्ष 2026: बिहार में जमीन की रसीद, केवाला और रिकॉर्ड ऑनलाइन कैसे निकालें? पूरा विवरण

बिहार में जमीन से जुड़े रिकॉर्ड को देखना और रसीद काटना अब पूरी तरह से डिजिटल हो चुका है। सरकार ने Bihar Bhumi (Revenue and Land Reforms Department) पोर्टल को इतना अपडेट कर दिया है कि अब आप घर बैठे अपने दादा-परदादा के नाम की जमीन का रिकॉर्ड देख सकते हैं और लगान (Tax) भी भर सकते हैं। आज की इस महा-गाइड में हम दाखिल-खारिज, परिमार्जन, LPC, भू-नक्शा और पुराने केवाला के बारे में विस्तार से जानेंगे।

1. बिहार भूमि पोर्टल का उद्देश्य क्या है?

राज्य सरकार ने बिहार भूमि पोर्टल (biharbhumi.bihar.gov.in) नामक एक ऑनलाइन प्लेटफॉर्म शुरू किया है। भूमि रिकॉर्ड में पारदर्शिता लाना और भ्रष्टाचार को कम करना इसका मुख्य लक्ष्य है। अब आपको अंचल (ब्लॉक) के चक्कर काटने की आवश्यकता नहीं है।

2. अपनी जमीन के रिकॉर्ड और जमाबंदी को कैसे देखें? (Step-by-Step) जमाबंदी में जमीन मालिक का नाम, क्षेत्रफल और खाता-खेसरा नंबर शामिल हैं।

  • पहला चरण: आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं और "जमाबंदी पंजी देखें" पर क्लिक करें।
  • द्वितीय चरण: आपका क्षेत्र, अंचल और हल्का चुनें।
  • तीसरा चरण: आप प्लॉट नंबर, खाता नंबर या अपने नाम से सर्च कर सकते हैं।: "देखें" पर क्लिक करते ही आपकी जमीन की पूरी जानकारी स्क्रीन पर दिखाई देगी।

3. ऑनलाइन लगान रसीद कैसे काटें? Bhu-Lagan online

यदि आपकी रसीद कई सालों से पुरानी है, तो कोई दूसरा व्यक्ति आपकी जमीन पर दावा कर सकता है। ऑनलाइन इसका अपडेट इस तरह करें:
  • पोर्टल में 'ऑनलाइन लगान' का विकल्प चुनें।
  • बकाया देखने के लिंक पर क्लिक करें। यहाँ कितना लगान बाकी है पता चलेगा।
  • "ऑनलाइन भुगतान करें" पर क्लिक करके UPI या Net Banking का उपयोग करके भुगतान करें।
  • PDF रसीद डाउनलोड करने के बाद भुगतान करना न भूलें।

4. परिमार्जन (परिमार्जन): रिकॉर्ड गलती को कैसे सुधारें?

  • अक्सर डिजिटल रिकॉर्ड में नाम की स्पेलिंग या रकबा (क्षेत्र) गलत है। सरकार ने 'परिमार्जन' पोर्टल बनाया है जिसका उद्देश्य इसे बेहतर बनाना है।
  • यहाँ आप ऑनलाइन आवेदन करके अपनी जमीन के रिकॉर्ड को सुधारने की मांग कर सकते हैं। इसके लिए आपको केवाला या खतियान जैसे पुराने कागजात अपलोड करना होगा।

5. पुराना केवाला और खतियान कैसे निकालें?

1950 से पहले के कागजात खोजना बिहार में मुश्किल था, लेकिन अब आप पुराने निबंधन रिकॉर्ड को 'View Web Copy' के माध्यम से देख सकते हैं। अगर यह नहीं उपलब्ध है, तो आपको जिला अभिलेखागार में 'नकल' के लिए आवेदन देना होगा।

6. बिहार जमीन सर्वे, 2026: क्या दस्तावेज तैयार हैं?

बिहार के गाँवों में अभी विशेष जमीन सर्वे चल रहा है। इसके लिए निम्नलिखित दस्तावेजों को तैयार रखें:
  • Genealogy (Form 3): अपने पूर्वजों से संबंध साबित करने के लिए
  • अपनी खुद की घोषणा (Form 2): भूमि का विवरण देने के लिए
  • मोबाइल नंबर और आधार कार्ड

7. LPC (Land Possession Certificate) के लाभ: 

LPC, जिसका अर्थ है "जमीन स्वामित्व प्रमाण पत्र", बैंक से लोन लेने या सरकारी अनुदान लेने के लिए आवश्यक है। ऑनलाइन आवेदन करने के लिए, आपके नाम पर आपकी जमाबंदी अपडेट होनी चाहिए।

8: जमीन विवाद के बारे में शिकायत कहाँ करें?

बिहार में जमीन के झगड़ों में भाग लेने के लिए आप इन स्थानों पर जा सकते हैं:
  • मूल स्तर: अंचलाधिकारी (CO) को लिखित शिकायत दी गई है।
  • थैली स्तर: शनिवार को थाने में जनता दरबार में
  • वेबसाइट: बिहार लोक शिकायत निवारण पोर्टल (BPGRC) पर

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न 

(1): रसीद काटना हर साल आवश्यक है? 
हाँ, रसीद काटने से कानूनी रूप से आप जमीन पर मालिक हैं।

(2): दाखिल-खारिज (Mutation) कैसे होता है? 
नियमानुसार, इसमें 21 से 45 दिन लगते हैं।

(3): क्या मैं किसी अन्य व्यक्ति की जमीन का रिकॉर्ड देख सकता हूँ? 
ठीक है, यह एक सार्वजनिक पोर्टल है, इसलिए आप आसानी से किसी भी प्लॉट की जानकारी देख सकते हैं।


निष्कर्ष (Conclusion): बिहार में जमीन डिजिटल है। हमारा लक्ष्य आपका डिजिटल गाइड बनाना है। हमेशा अपनी जमीन के कागजात को अपडेट रखें और गलतियों को "परिमार्जन" के माध्यम से सुधारें। जमीन विवाद से बचने के लिए सतर्क रहें।


About the author:बिहार के नागरिकों को डिजिटल सेवाओं का लाभ उठाने में मदद करने के लिए निशांत (राजस्व एवं भूमि सुधार जानकार) ने "आपका डिजिटल गाइड" बनाया है। वे आम भाषा में दाखिल-खारिज जैसी जटिल प्रक्रियाओं और बिहार भूमि पोर्टल की तकनीकी बारीकियों को समझाने में माहिर हैं। उनका लक्ष्य है कि बिहार का हर किसान और ज़मींदार अपना काम खुद कर सके, बिना दलालों के चक्कर लगाए।

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